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Friday, 17 November 2017

रसगुल्ले के बाद अब इन मिठाइयों पर दावे की बंगाल की तैयारी

रसगुल्ले पर ओडिशा के साथ लंबी लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल को जीत मिली है। वहीं अब पश्चिम बंगाल के कई और मिठाइयों पर दावा ठोंकने की तैयारी शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल सरकार चार बंगाली पारंपरिक मिठाइयों के लिए भौगोलिक पहचान (जीआइ) टैग हासिल करने पर विचार कर रही है।

इन मिठाइयों में दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर में धान के लावे से तैयार होने वाला मोआ, नदिया जिले के कृष्णनगर में दूध की क्रीम से तैयार होने वाले सरभाजा सरपुरिया तथा बद्र्धमान का चावल-बेसन, खोवा व छेना से तैयार होने वाले सीताभोग और मिहीदाना तथा शक्तिगढ़ का खोवा व छेना से तैयार होने वाला लेंचा प्रमुख है।
रसगुल्ले के बाद अब इन मिठाइयों के निर्माता से लेकर मिठाई प्रेमी लोग मांग करने लगे हैं कि इन सभी उत्पादों पर भी दावा ठोककर जीआइ टैग लिया जाए ताकि न केवल इन मिठाइयों की नकल पर लगाम लग सके, बल्कि इन्हें भविष्य में निर्यात भी किया जा सके। जीआइ पंजीकरण मिलने से उक्त उत्पाद का ईजाद कहां हुआ है इसका पता चलता है। पश्चिम बंगाल सरकार भी अब इन मिठाइयों को लेकर गंभीर है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शक्तिगढ़ में ममता सरकार ने लेंचा हब तैयार करने की घोषणा पहले से ही कर रखी है।
रसगुल्ले को लेकर फिर से दावा ठोंकेगा ओडिशा
रसगुल्ले की भौगोलिक पहचान (जीआइ) पश्चिम बंगाल के खाते में चली गई, लेकिन ओडिशा सरकार हार मानने को तैयार नहीं है। ओडिशा सरकार के प्रवक्ता सूर्य नारायण पात्र का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। फिर से हमलोग दावा ठोंकेंगे। वहीं ओडिशा भाजपा के नेता सज्जन शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार की उदासीनता की वजह से पश्चिम बंगाल को रसगुल्ले का जीआइ टैग मिल गया है। पश्चिम बंगाल सरकार अब रसगुल्ले का पेटेंट कराने की तैयारी में है।


Wednesday, 15 November 2017

तस्वीरों के जरिए जानें, भगवान शिव के ये आभूषण देते हैं किन बातों का संदेश

शिव त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। तस्वीरों में जानिए शिव के इस स्वरूप को।

तीसरी आंख
शिव की जो तस्वीर हमारे मस्तिष्क में अंकित है उसमें शिव को तीन नेत्रों वाला दिखाया गया है। माना गया है कि मनुष्य की दो आँखें सांसारिक वस्तुओं को दर्शाता है। वहीं शिव की तीसरी नेत्र सांसारिक वस्तुओं से परे संसार को देखने का बोध कराती है। यह एक दृष्टि का बोध कराती है जो पाँचों इंद्रियों से परे है। इसलिये शिव को त्रयंबक कहा गया है।

सर्प है कुंडलिनी
योग में सर्प को कुंडलिनी का प्रतीक माना गया है। इस अंदरूनी उर्जा का दर्ज़ा हासिल है जिसका प्रयोग अब तक नहीं हुआ है। कुंडलिनी के स्वभाव के कारण ही उसके अस्तित्व का पता नहीं चल पाता। इंसान के गले के गड्ढ़े में विशुद्धि चक्र होता है जो बाहर के हानिकारक प्रभावों से आपके शरीर को बचाता है। साँप में जहर होता है और विशुद्धि चक्र को छलनी की संज्ञा दी गयी है।

जीवन के तीन पहलुओं का प्रतिबिंब है त्रिशूल
शिव का त्रिशूल मानव शरीर में मौजूद तीन मूलभूत नाड़ियों बायीं, दाहिनी और मध्य का प्रतिबिंब है। इनसे 72,000 नाड़ियाँ निकलती हैं। सजगता की स्थिति में यह बात महसूस की जा सकती है कि उर्जा की गति अनियमित न होकर निर्धारित पथों यानी 72,000 नाड़ियों से होकर गुजर रही है।

नंदी है सजगता के साथ प्रतीक्षा का प्रतीक
प्रतीक्षा ग्रहणशीलता का मूल तत्व है और नंदी को इसका प्रतीक माना गया है। नंदी में ग्रहणशीलता के गुण है और वो शिव के करीब हैं। नंदी को सक्रिय और सजग माना गया है जो सुस्त नहीं हैं और जिनके अदंर जीवन है। भारतीय संस्कृति में योग भी सक्रियता का उद्यम माना गया है।

सोम का अर्थ केवल चंद्रमा नहीं
भगवान शिव को सोम भी कहा गया है सोम का पर्याय नशा भी होता है। नशे में रहने के लिये केवल मय या अन्य भौतिक वस्तुओं की जरूरत नहीं होती। इंसान अपने जीवन में मदमस्त होकर भी नशे में रह सकता है। नशे का आनंद उठाने के लिये सचेतावस्था में रहना आवश्यक है। वहीं, चंद्रमा को भी सोम कहा गया है जिसे नशे का स्रोत माना गया है। भगवान शिव चंद्रमा को आभूषण की तरह पहनते है। चंद्र धारण करने वाले शिव अपने जीवन में योगी की तरह मस्त रहते हैं जो जीवन का आनंद तो उठाता है लेकिन किसी क्षणिक आनंद को स्वयं पर हावी नहीं होने देता।

Monday, 13 November 2017

150 साल का समय लगा था इस शिव मंदिर को तैयार होने में...जानें मंदिर की और भी खास बातें...

कैलाश मंदिर संसार में अपने ढंग का अनूठा वास्तु जिसे मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (760-753 ई.) ने निमित्त कराया था। यह एलोरा जिला औरंगाबाद स्थित लयण-श्रृंखला में है। एलोरा की 34 गुफाओं में सबसे अदभुत है कैलाश मंदिर। विशाल कैलाश मंदिर देखने में जितना खूबसूरत है उससे ज्यादा खूबसूरत है इस मंदिर में किया गया काम। कैलाश मंदिर की खास बात यह है कि इसे इस विशालकाय मंदिर को तैयार करने में करीब 150 साल लगे और करीब 7000 मजदूरों ने लगातार इस पर काम किया। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें।


कहां है कैलाश मंदिर
एलोरा का कैलाश मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में प्रसिद्ध एलोरा की गुफाओं में स्थित है। यह एलोरा के 16वीं गुफा की शोभा बढ़ा रही है। इसका काम कृष्णा प्रथम के शासनकाल में पूरा हुआ। कैलाश मंदिर में अति विशाल शिवलिंग देखा जा सकता है।

भगवान शिव को समर्पित है मंदिर
कैलाश मंदिर को हिमालय के कैलाश का रूप देने का भरपूर प्रयास किया गया है। शिव का यह दो मंजिला मंदिर पर्वत चट्टानों को काटकर बनाया है। यह मंदिर दुनिया भर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।

कैसे बना है ये मंदिर
90 फीट है इस अनूठे मंदिर की ऊंचाई, 276 फीट लम्बा, 154 फीट चौड़ा है यह गुफा मंदिर। 150 साल लगे इस मंदिर के निर्माण में और दस पीढ़ियां लगीं। 7000 कामगारों ने लगातार काम करके तैयार किया है ये मंदिर।


आजतक इस मंदिर में कभी पूजा किए जाने का प्रमाण नहीं मिलता। आज भी इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। कोई नियमित पूजा पाठ का कोई सिलसिला नहीं चलता।

पत्थर को काटकर बनाया था मंदिर
इसके निर्माण में करीब 40 हज़ार टन वजनी पत्थरों को काटकर 90 फुट ऊंचा मंदिर बनाया गया। इस मंदिर के आंगन के तीनों ओर कोठरियां हैं और सामने खुले मंडप में नंदी विराजमान है और उसके दोनों ओर विशालकाय हाथी और स्तंभ बने हैं।


नक्काशी है भव्य
एलोरा की गुफा-16 यानि कैलाश मंदिर सबसे बड़ी गुफा है, जिसमें सबसे ज्यादा खुदाई कार्य किया गया है। यहां के कैलाश मंदिर में विशाल और भव्‍य नक्काशी है। कैलाश मंदिर ‘विरुपाक्ष मंदिर’ से प्रेरित होकर राष्ट्रकूट वंश के शासन के दौरान बनाया गया था

Thursday, 2 November 2017

शाहरुख़ खान के बर्थडे के एक दिन बाद इत्तेफ़ाक, जानिये इसमें क्या है ख़ास

इत्तेफ़ाक -It Happened One Night को इतने करोड़ रूपये की ओपनिंग लग सकती है और उसके बाद की कमाई माउथ पब्लिसिटी के जरिये हो सकती है।
मुंबई। करीब 48 साल बाद बड़े परदे पर एक नया इत्तेफ़ाक होने जा रहा है। ये इत्तेफ़ाक से नहीं जानबूझ कर है। बात सिद्धार्थ मल्होत्रा, सोनाक्षी सिन्हा और अक्षय खन्ना स्टारर इत्तेफ़ाक-It Happened One Night की हो रही है, जो इस हफ़्ते रिलीज़ हो रही बड़ी फिल्म है। आइये जानते हैं इस फिल्म से क्या हैं उम्मीदें।
10 अक्टूबर 1969 को सिनेमा के परदे पर राजेश खन्ना और नंदा की फिल्म इत्तेफ़ाक लगी थी और अब उसी फिल्म का रीमेक इस शुक्रवार को रिलीज़ किया जा रहा है। नई फिल्म में कुछ नए ट्विस्ट हैं इसलिए पुरानी इत्तेफ़ाक देख चुके लोगों सहित सभी से फिल्म के राज़ छिपाने की कोशिश की गई जिसके तहत का भारी भरकम प्रमोशन भी नहीं किया गया। दरअसल नई इत्तेफ़ाक इसलिए बड़ी बन गई क्योंकि फिल्म के साथ शाहरुख़ खान और करण जौहर के बैनर जुड़ गए। सिद्धार्थ और सोनाक्षी जैसे ए लिस्टर स्टार भी और अपने कड़क अंदाज़ के साथ अक्षय खन्ना भी। फिल्म के ट्रेलर में मर्डर , सस्पेंस , शक और पड़ताल पर फ़ोकस किया गया है।
 
बी आर चोपड़ा के ग्रैंडसन अभय चोपड़ा निर्देशित इस फिल्म की अवधि करीब एक घंटा 45 मिनिट है। करीब 30 करोड़ रूपये में बनी इस फिल्म को 1800 स्क्रीन्स में रिलीज़ किया जा रहा है। सेंसर ने फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट के साथ पास किया है।ट्रेड सर्किल के मुताबिक इस फिल्म को चार से पांच करोड़ रूपये की ओपनिंग लग सकती है और उसके बाद का फ़ैसला माउथ पब्लिसिटी के जरिये ही होगा। इत्तेफ़ाक -It Happened One Night, साल 1969 में आई यश चोपड़ा की इत्तेफ़ाक का मॉर्डर्न संस्करण है। पुरानी इत्तेफ़ाक में राजेश खन्ना और नंदा का बेहतरीन अभिनय देखने मिला था। इस फिल्म को यश चोपड़ा ने निर्देशित किया था और उनके बड़े भाई बी आर चोपड़ा ने प्रोड्यूस।
राजेश खन्ना की इत्तेफ़ाक भी ओरिजनल कहानी नहीं थी। ये सरिता जोशी के गुजराती नाटक ' धुम्मास ' की कहानी पर आधारित थी। यश चोपड़ा इसी नाटक को देखने के लिए गए, जो उन्हें इतना अच्छा लगा कि उन्होंने फिल्म बनाने का फैसला कर लिया।

Wednesday, 1 November 2017

रहस्‍य और रोमांच की है दरकार तो किसी पार्टनर के साथ इन पांच जगहों पर घूमें बार-बार

हम आज आप को पांच टूरिस्‍ट डेस्‍टिनेशन बता रहे हैं। बस रखें इतना ख्‍याल की यहां अकेले जाना हो सकता है खतरनाक। इसलिए जायें किसी भरोसेमंद साथी के साथ।
अल सल्‍वाडोर में सैन सल्‍वाडोर
अल सल्‍वाडोर के बारे में कहा जाता है कि ये दुनिया की सबसे वायलेंट कंट्री है और इसकी राजधानी सैन सल्‍वाडोर में सबसे ज्‍यादा हत्‍यायें हुई हैं। वैसे ये एक खूबसूरत जगह है। अब यहां हत्‍याओं की दर में कमी आ गयी है। आंकड़े बताते है कि यहां पहले के मुकाबले अब हर 100,000 पर 190 की जगह 137 मौतों की ही खबर सुनाई देती है।
मैक्‍सिको का अकापुल्को शहर
चलिए अब चलते हैं अकापुल्को जो मैक्‍सिको का एक शहर है। यहां पर अमेरिकी सरकारी अधिकारियों को जाने की इजाजत नहीं है क्‍योंकि ये भी दुनिया सबसे वायलेंट शहर माना जाता है। हत्‍याओं के अलवा ड्रग माफिया का आतंक भी यहां एक बड़ी समस्‍या है। 
होंडुरास का सैन पेड्रो सुला
क्रूर हत्‍याओं के लिए कभी होंडुरास का सैन पेड्रो सुला नगर टॉप पर था। हालाकि अब इसका स्‍थान तीसरा है। एक मैक्‍सिकन शोध के अनुसार कभी प्रति 100,000 में इस शहर में 169 लोगों की हत्‍या हो जाती थी। बिना कुछ कहे कुछ लोग अचानक गलियों में गश्‍त करती पुलिस पर गोलियां चलाना शुरू कर देते हैं। गैरकानूनी हथियारों की खरीद फरोख्‍त यहां की सबसे बड़ी समस्‍या है।
ब्राजील का मनौस 
हालाकि रियो भी एक खतरनाक शहर है पर ये ब्राजील के टॉप फोर खतरनाक शहरों में भी नहीं गिना जाता क्‍योंकि यहां पर मनौस जैसे खतरनाक शहर मौजूद हैं। वैसे मनौस अपने खूबसूरत बीचेस और एडवेंचर र्स्‍पोटस के लिए भी प्रसिद्ध है लेकिन सबसे ज्‍यादा शोहरत उसे यहां होने वाली खतरनाक हत्‍याओं के लिए दिलाई है। 2016 में हत्‍याओं के मामले में ये ब्राजील का नंबर वन शहर था। 
ग्‍वाटेमाला की ग्‍वाटेमाला सिटी
ब्रिटिश गवरमेंट के अध्‍ययन के अनुसार ग्‍वाटेमाला सिटी लैटिन अमेरिका में सबसे ज्‍यादा अपराध दर वाला शहर है। यहां आने वाले पर्यटकों को जान धमकी देना और उनको लूटना यहां होने वाला सामान्‍य अपराध है, विशेष रूप से रात में।

चलिए दुनिया को कोहिनूर हीरा देने वाले गोलकुंडा के किले की सैर पर

गोलकुंडा के किले को कई नामों जैसे या गोलकोण्डा गोल्ला कोंडा से बुलाया जाता है। ये किला अपने बेशकीमती हीरे जवाहरातों जैसे कोहिनूर के लिए भी फेमस है।
 
भारत के दक्षिण में है ये किला
भारत के दक्षिण में बना यह किला 1518-1687 के बीच गोलकुंडा के कुतब शाही साम्राज्य की मध्यकालीन सल्तनत की राजधानी था। गोलकुंडा किला हैदराबाद के दक्षिण में 11 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह भारत के तेलंगना राज्य में आता है। यह प्राचीन और प्रसिद्ध किला है। पूरी दुनिया में ये किला इसलिये भी प्रसिद्ध था क्योकि यहां से कई बेशकीमती चीजे मिली थी जैसे कोहिनूर हीरा, होप डायमंड, नसाक डायमंड और नूर-अल-एन आदि। हालाकि अब ये दक्षिणी भारत में, हैदराबाद नगर के पास एक दुर्ग तथा ध्वस्त नगर के रूप में ही शेष है। 
किले की कहानी 
इस दुर्ग का निर्माण वारंगल के राजा ने 14वीं शताब्दी में कराया था,जिसे बाद में बहमनी राजाओं के अपने अधिकार में कर लिया और ये मुहम्मदनगर के नाम से जाना जाने लगा। 1512 में यह कुतबशाही राजाओं के अधिकार में आया और वर्तमान हैदराबाद के निर्माण तक उनकी राजधानी रहा। 1687 में औरंगजेब ने इस पर विजय प्राप्‍त कर ली। 
शानदार शिल्‍प का नमूना 
गोलकुंडा का किला ग्रैनाइट की एक पहाड़ी पर बना है जिसमें आठ दरवाजे हैं। ये चारों ओर से पत्थर की बनी लंबी मजबूत दीवार से घिरा हुआ है। इसके महलों तथा मस्जिदों के खंडहर आज भी अपने प्राचीन गौरव की कहानी कहते हैं। किले के दक्षिण में मूसी नदी बहती है। आज भी किले के आधा मील उत्तर में कुतबशाही राजाओं के ग्रैनाइट पत्थर के बने मकबरों के भग्‍नावशेष देखे जा सकते हैं। 

Tuesday, 31 October 2017

दुनिया के 10 खूबसूरत शहर जहां की सड़कों पर चलती हैं नावें

हॉलेंड का ये छोटा सा कस्‍बा बहुत खूबसूरत है। यहां की कुल आबादी 2600 है। यहां पर आप को सड़के कम मिलेंगी क्‍यों कि यहां के लोग नावों पर बैठ कर नहर में सफर करते हैं। यहां पर आप को लकड़ी के ढेरों खूबसूरत ब्रिज मिलेंगे।

सुझाऊ चीन का एक गांव है। ये गांव चीन के इतिहास में महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखता है। यहां के लोगों को नाव से चलना पसंद है। यहां पेड़ों से घिरी नहरों में आप को ढेरों नाव चलती हुई दिखेंगी।

फ्रांस का ये शहर पानी पर बसाया गया है। यहां पर आप को कुछ मीटर की दूरी पर ही कई ब्रिज नजर आयेंगे। नहर किनारे बने रेस्‍टोरेंट में सुबह की चाय की चुस्कियां लेने के लिये आप यहां आ सकते हैं। इस जगह को लॉर्ड एनेसी के नाम पर बसाया गया है।

वेनिस इटली के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। ये पूरा शहर पानी पर बसाया गया है। इसे 100 छोटे-छोटे आईसलैंड को मिला कर बसाया गया है। जो भी इटली जाये एक बार गोंडोला राइड जरूर ले। यहां पर आप को एक भी सड़क नहीं दिखेगी। यहां के लोग नाव पर ही चलते हैं।

अफ्रीका का छोटा सा गांव गेनवी अपनी खूबसूरती के लिये मशहूर है। यहां की आबादी 20 हजार है। ये नोकूई झील के बीच में बसा हुआ गांव है। यहां पर लोग अपना व्‍यापर भी नाव पर ही किया करते हैं। ये जगह आप के घूमने के लिये बेहतरीन जगहों में से एक है।

ब्रूगेस बेल्जियम राजधानी होने के साथ सबसे बड़े शहरों में से एक है। ये पूरा शहर पानी पर बसाया गया है। यहां के लोग नाव पर ही आते जाते हैं। आप को यहां एक दो सड़के दिखाई देंगी पर लोगों को पानी में नाव पर बैठ कर चलना ही पसंद है। यह जगह जन्‍नत से कम नहीं है।

स्‍वी‍डन की राजधानी स्‍टॉकहोम 14 आइसलैंड पर बनी है। यहां पर 50 से ज्‍यादा ब्रिज हैं। झील के किनारे बसा ये शहर बहुत खूबसूरत है। यहां की नीली पीली इमारते आप को आकर्षित करेंगी। यह जगह जन्‍नत से कम नहीं हैं।

जर्मनी का हमबर्ग शहर अपनी खूबसूरती के लिये प्रसिद्ध है। इसे पुलों का शहर भी कहा जाता है। यहां इमारतों को जोड़ने के लिये पुलों का इस्‍तेमाल किया गया है। यहां पर 2500 से अधिक ब्रिज हैं। पर्यटक यहां पानी पर बने खूबसूरत आर्कीटेक्‍चर को देखने के लिये आते हैं।

भारत का ये राज्‍य समुद्र किनारे बसा हुआ है। केरल अपने आप में बहुत खूबसूरत प्रदेश है। यहां के लोग नावों पर व्‍यापार करते हैं। यहां दुनिया की पांच सबसे बड़ी झीलों में से एक झील है। केरल की खूबसूरती आप का मन मोह लेगी।

इंगलैंड का बर्मिंघम शहर दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। पानी में इस शहर को बहुत खूबसूरती के साथ बसाया गया है। यहां आप को झील किनारे बैठ कर शहर की खूबसूरती निहार सकते हैं। शहर के अंदर नहरों पर लकड़ी के खूबसूरत पुल बने हुये हैं।


    कहीं नहाने तो कहीं क‍िस करने पर बैन, 10 देशों के 10 अजब-गजब कानून

    अलग-अलग देशों के अलग-अलग कानून होते हैं। कुछ देशों में कुछ कानून ऐसे हैं जो सुनने में थोड़े अजीब भी लगते हैं। यहां पढ़ें 10 देशों 10 अजब-गजब कानूनों के बारे में...



    इंटरनेट का यूज गैरकानूनी
    बर्मा देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करना कानून के खिलाफ है। चोरी से इस्‍तेमाल करने वाले को जेल हो सकती है।
    रिलैक्स करना गैरकानूनी
    स्विटजरलैंड में एक बड़ा अजीबोगरीब कानून है। यहां रात 10 बजे के बाद पुरुषों का खड़े होकर रिलैक्स करना गैरकानूनी है।
    एक टब में बाथ कराना बैन 
    अमेर‍िका के लॉस एंजिल्स में एक टब में दो बच्चों को स्नान कराना गैरकानूनी है। ऐसा करने पर एक्‍शन ल‍िया जा सकता है। 
    पिंक कलर की पैंट्स पर पाबंदी 
    ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया का एक बड़ा अनोखा कानून हैं। यहां रविवार को दिन में पिंक कलर की पैंट्स पहनने पर पाबंदी है।
    अंडरवि‍यर से साफ करना बैन
    कैलीफोर्नि‍या के सैन फ्रांसिस्को में कार वॉशिंग के दौरान कार को अंडरवि‍यर से साफ करने पर कानूनी रूप से पाबंदी लगी है। 
    मूंछों वाले नहीं कर सकते क‍िस
    नेवाडा के यूरेका में भी मजेदार कानून है। वहां मूंछों वाले पुरुषों द्वारा महिलाओं को किस करना गैरकानूनी है। 
    यहां नहाना भी गैरकानूनी 
    इंग्‍लैंड के मैसाच्यूट्स में रात में ब‍िना नहाए बिस्तर पर जाना और रविवार के दिन नहाना भी गैरकानूनी माना जाता है। 
    कपड़े बदलने पर पाबंदी
    ओहियो के ऑक्सफोर्ड में औरतों द्वारा क‍िसी भी पुरुष की तस्‍वीर के सामने अपने कपड़े बदलने पर पाबंदी है। 
    दमकल कर्मी नहीं बचा सकते
    मिसौरी में नाइट गाउन पहने मह‍िलाओं को दमकल कर्मी नहीं बचा सकते है। ऐसा वहां गैरकानूनी माना जाता है। 
    जानवरों की नकल नहीं कर सकते
    फ्लोरिडा के मियामी में जानवरों की नकल उतारना गैरकानूनी माना जाता है। कानून तोड़ना र‍िस्‍की होता है। 

    जब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया 36 बच्‍चों का पिता, अभी होने को है एक और बच्‍चा

    क्‍या आपने क‍िसी के 36 बच्चे सुने हैं। अगर नहीं तो इन 36 बच्‍चों का पिता से म‍िल सकते हैं। इन्‍हें अभी एक बेबी और होने को है। इनका एक वीड‍ियो भी वायरल हो रहा है...
    37वें बच्‍चे का बेसब्री से इंतजारजी हां इन द‍िनों 36 बच्चों के प‍िता गुलजार खान का फेसबुक पर एक वीड‍ियो तेजी से वायरल हो रहा है।इस वीड‍ियो को अब तक बड़ी संख्‍या में लोग देख चुके हैं। इसके बाद लोग इस पर अपने-अपने मुताबि‍क प्रत‍िक्रिया भी दे रहे हैं। पाक‍िस्‍तान के इस्लामाबाद में रहने वाले गुलजार खान की तीसरी पत्‍नी इन द‍िनो गर्भवती है, ज‍िससे वह काफी खुश हैं। उन्‍हें व उनके पूरे पर‍िवार को इस आने वाले मेहमान का बेसब्री से इंतजार है। 
    भाई को तीन पत्नियां और 22 बच्चे
    गुलजार खान के पर‍िवार में तीन पत्नियां और 36 बच्‍चे हैं। कई बच्‍चों की शादी होने से उन्‍हें पोते-पोत‍ियां भी हैं, ज‍िससे वर्तमान में गुलजार के पर‍िवार में करीब 150 से अधिक सदस्य हैं। आज इनका पर‍िवार पाक‍िस्‍तान ही नहीं बल्‍क‍ि दूसरे देशों में भी चर्चा में रहता है। खास बात तो यह है क‍ि गुलजार के भाई मस्तान की भी तीन पत्नियां और 22 बच्चे हैं। उन्‍हें व उनके भाई मस्तान को अपने इस बड़े पर‍िवार पर गर्व महसूस होता है। 
    बच्‍चों ने लड़ाई में उनकी बड़ी मदद की
    इस संबंध में गुलजार का कहना है क‍ि इतना बड़ा पर‍िवार उन्‍होंने कुछ खास कारणों से क‍िया है। कुछ आद‍िवासी समूहों से दुश्‍मनी की वजह से उन्‍हें 36 बच्‍चों का प‍िता बनना पड़ा। आद‍िवासी समूहों से होने वाली लड़ाई में उनके बच्‍चों ने बड़ी मदद की। वहीं उनका यह भी कहना है क‍ि अगर अल्‍लाह ने उन्‍हें इतने बच्‍चे दि‍ए हैं तो उन्‍हें पूरा भरोसा है क‍ि उनका कोई भी बच्‍चा भूखा नहीं सोएगा। अल्‍लाह सबको रोटी का बंदोबस्‍त करेगा। 

    Monday, 30 October 2017

    भारत के इन मंदिरों और उनके चमत्‍कारी रहस्‍य जान आप हो जाएंगे हैरान

    हिंदू धर्म के मठ, मंदिर, सिद्धपीठ, ज्योतिर्लिंग और गुफाएं सब अपने में एक चमत्‍कारिक कहानी संजोए हैं। तो चलिए जानें ऐसे ही कुछ खास चर्चित चमत्‍कारी रहस्‍य।
    ज्वालादेवी से ज्‍वाला निकलना 
    इस मंदिर में अनंत काल से ज्वाला निकल रही है इसी कारण इसे ज्वालादेवी का मंदिर कहते हैं। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा हुआ है। देवी के शक्‍ति पीठों में से एक इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। इसलिए यहां पर ज्‍वाला निकलती रहती है। इसके अलावा यहां पर एक और चमत्कार देखने को मिलता है। मंदिर परिसर के पास ही एक जगह है 'गोरख डिब्बी' जो कि एक जल कुंड है। इस कुंड में गर्म खौलता हुआ पानी है, जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है।
    कालभैरव का मदिरा पीना
    मध्यप्रदेश के उज्जैन में कालभैरव के मंदिर में उन्‍हें मदिरा पिलाई जाती है। क्‍योंकि यहां भगवान कालभैरव को मदिरापान कराने की परंपरा हैं। इसकी वैज्ञानिक जांच भी हुई कि आखिर ये मदिरा कहां जाती है, लेकिन कुछ नहीं पता चल सका। कालभैरव का यह मंदिर लगभग 6,000 साल पुराना है। मदिरा पिलाने की प्रथा भी काफी पुरानी हो चुकी है।
    पुरी का जगन्नाथ मंदिर 
    ओडिशा के नगर पुरी के तट पर भगवान जगन्नाथ का एक प्राचीन मंदिर स्थापित है। यहां आज भी भक्‍तों की काफी भीड़ होती है। यहां भी कई चमत्‍कारी रहस्‍यों की बातें होती हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर के गुंबद की छाया नहीं बनती है। इसके अलावा इस मंदिर के ऊपर लगा झंडा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। इसके अलावा इसके गुंबद के आसपास कोई पक्षी नहीं उड़ता है। काफी जांच पड़ताल के बावजूद भी इन रहस्‍यों का खुलासा नहीं हो सका है।
    मैहर माता का मंदिर
    जबलपुर जिले में मैहर की माता शारदा का प्रसिद्ध मंदिर है। बताया जाता है यहां पर जब मंदिर बंद हो जाता है अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज आती है। मान्‍यता है कि मां का भक्त आल्हा अभी भी यहां पूजा करने आता है, लेकिन मंदिर खोलने पर कोई नहीं दिखाई देता। कई बार जांचने की कोशिश की गई लेकिन असफलता ही हाथ लगी।
    केदारनाथ का मंदिर  
    केदारनाथ मंदिर एक चमत्कारिक मंदिर है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि इस पर कभी कोई परेशानी नही आती है। यह हमेशा से जैसा का तैसा खड़ा है। पांडवों द्वारा निर्मित इस मंदिर का शंकराचार्य के बाद राजा भोज ने जीर्णोद्धार करवाया था। जुलाई 2013 में केदारनाथ में जो जलप्रलय हुई थी उसमें लगभग 10,000 लोग मौत की नींद में सो गए थे लेकिन मंदिर का बाल भी बांका नहीं हुआ। आज भी यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
    रामेश्वरम का मंदिर 
    रामेश्वरम में भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। कहा जाता है कि आज भी रामेश्‍वरम में समुद्र अपने पूरे अदब और संयम के साथ ही रहता है। यहां समुद्र कभी उफान पर नहीं आता है। यहां पर श्रीरामेश्वरमजी का मंदिर 1,000 फुट लंबा है। इसके अलावा यह  650 फुट चौड़ा तथा 125 फुट ऊंचा है। इस मंदिर में प्रधान रूप से एक हाथ से भी कुछ अधिक ऊंची शिवजी की लिंग मूर्ति स्थापित है।
    रामसेतु के पत्थर 
    पूरी दुनिया में एकमात्र रामसेतु का स्थान ऐसा है। जहां के पत्थर पानी में तैरते हैं। यहां स्थित चट्टानों और पत्थरों को बेचने पर रोक लगा रखी गई है फिर भी गाइडों के माध्यम से स्थानीय लोग चोरी-छुपे ये पत्थर बेचते हैं। आजकल ये पत्थर बहुत से संतों और कुछ लोगों के पास देखे जा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि रामसेतु या नलसेतु को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था वे पत्थर पानी में फेंकने के बाद समुद्र में नहीं डूबे, बल्कि पानी की सतह पर ही तैरते रहे।
    मूर्तियों का दूध पीना 
    हालाकि ये किसी एक मंदिर विशेष की बात नहीं है, पर कहा जाता है कि 1 सितंबर 1995 में और 2006 दुनियाभर में मूर्तियों ने दूध पिया था। भारत सहित नेपाल, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि में भी इस चमत्कार के दौरान मूर्तियों के कई किलो दूध पीने का दावा किया गया। हालांकि इसके पीछे वैज्ञानिकों ने तर्क दिए थे कि शायद गर्मी के कारण मूर्तियों की नमी समाप्त हो गई हो और इस वजह से ऐसे संभव हुआ हो। हालांकि काफी जांच की गई कि आखिर इतना सारा दूध कहां गया लेकिन आज तक यह रहस्‍य नहीं खुला है।

    ये कुत्‍ते नहीं राजनेता हैं, कोई रह चुका है मेयर तो कोई ड्यूक

    आपको लगता होगा कि सिर्फ इंसान ही मेयर का चुनाव लड़ और जीत सकते हैं तो आप गलत हैं। हम आपको उन जानवरों से मिलवाने जा रहे हैं जो मेयर के पद पर मैनात रह चुके हैं।

    1- ड्यूक द डॉग
    ड्यूक एक नौ साल का कुत्‍ता है। ड्यूक को तीसरी बार कोरमोरेंट का मेयर चुना गया है। इस टाउन शिप में एक हजार लोग रहते हैं। वोटिंग के दौरान किसी ने भी इस कुत्‍ते के खिलाफ वोटिंग नहीं की। 
     
    2- स्‍टूबस द कैट
    स्‍टूबस नाम की 17 साल की एक बिल्‍ली पिछले 15 सालों से अलास्‍कन गांव की मेयर है। 1997 से स्‍टूबस यहां की टॉप कैट है। यहां घूमने आने वालों के लिए एक किसी आकर्षण से कम नहीं है। इतना ही नहीं वो सोशल मीडिया पर भी खूब सक्रिय रहती है। 
     
    3- बोस्‍को द डॉग
    कैलेफोर्नियां के एक सुनोल में बोस्‍को द डॉग को एक बार फिर से मेयर पद के लिए चुना गया है। बोस्‍को यहां पिछले 13 सालों से अपनी सेवाएं दे रहा है। 1981 और 1994 में बोस्‍को ने दो इंसानो को हराकर यह खिताब जीता था। अपनी मौत के समय तक वो सेवाएं देता रहा। 
     
    4- पिगासुस द पिग
    पिगासुस द पिग को यूथ इंटरनेशनल पार्टी जो 1968 में वियतनाम वॉर के दौरान हो रहे राष्‍ट्रपति चुनाव के विरोध में खड़ा किया गया था। इस दौरान पुलिस ने पिगासुस और उसके सात सपोटर्स को भी हिरासत में ले लिया था। 
     
    5- गिगलेस द पिग 
    सिटी ऑफ फ्लिंट जिसे व्‍हीकल सिटी के नाम से भी जाना जाता है उस सीट गिगलेस ने भी मेयर पद के लिए आवेदन किया है। फ्लिंट और मिशिगन के दोस्‍तों से वो गिगलेस को मेयर का चुनाव जिताना चाहते थे। 
     
    6- टक्‍सीडो स्‍टेन
    कनाडा अक्‍सीडो पार्टी अक्‍सीडो स्‍टेन को चुनाव में खड़ा कर रही है। स्‍टेन को एक कैट लविंग राइटर ने एडॉप्‍ट किया था। ये उन बिल्लियों के लिए काम करती हैं जिनका अपना घर नहीं होता है।  2012 में आने के बाद स्‍टेन खुद को और मज बना रही है। 
     
    7- अर्ल ग्रे द कैट 
    अर्ल ग्रे कैट ने कनाडा के प्राइम मिनिस्‍टर के कंटेस्‍टेड में हिस्‍सा ले चुकी है। कैट के बावजूद वो इलेक्‍शन नहीं जीत सकी। 
     
    8- पा कैटले 
    पा कैटले एक डॉगी है। पा ने कोलोराडो के मेयर पद के लिए आवेदन किया था। डिवाइड के लोगों ने पा को नये मेयर के रूप में चुना था। वाइस मेयर के तौर पर एक वुल्‍फ था। उसका नाम केनी था। 
     
    9- मेयर मैक्‍स
    कैलेफोर्नियां के इडियलवाइल्‍ड में मैक्‍स नाम के एक कुत्‍ते को मेयर के रूप में चु‍ना गया था। 
     
    10- टिआओ
    टिआओ नाम के चिंपेंजी ने मेयर का चुनाव लड़ा। अपने इलेक्‍शन स्‍लोगन में उसने लिखा वोट मंकी एंड गेट मंकी। 

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