Showing posts with label Science. Show all posts
Showing posts with label Science. Show all posts

Wednesday, 25 October 2017

दुनिया की पहली स्‍मार्ट ट्रेन : चीन ने चलाई बिना पटरी वाली रेल

भविष्‍य का रेल सिस्‍टम बहुत अनोखा होगा। ट्रेन बिना ट्रैक के चलेगी। फ्यूचर ट्रेन चलाने के मामले में चीन पहला देश बन गया है। 


1- चीन ने दुनिया को पहली स्‍मार्ट ट्रेन का तोहफा दिया है। ये व्‍हीकल वर्चुअल रेल लाइन पर रन करेगा। इन लाइन्‍स को चाइना की सड़कों पर बिछाया गया है। चीन के झूजो प्रांत में इसे तैयार किया गया है। 

 2- ये ट्रेन एक बार में 300 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी। ट्रेन की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। ट्रेन में तीन कोच तैयार किए गए हैं। इन्‍हें आपस में मेट्रो की तरह जोड़ा गया है। जिससे स्‍मार्ट ट्रेन के अंदर भी यात्री एक कोच से दूसरे कोच में जा सकते हैं

3- ये स्‍मार्ट ट्रेन फ्यूचर का ट्रांसपोर्ट है। इस ट्रेन सिस्‍टम को शहर के लिए तैयार किया गया है। इसे ऑटोनोमस रेल रैपिड ट्रांसिट कहते हैं। इसे चीन रेल कार्पोरेशन ने तैयार किया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेन कंपनी है।
4- चीन के झूजो प्रांत में 4 मिलियन लोग रहते हैं। सभी को चीन के दूसरे शहरों में भी जाना होता है। ये ट्रेन उनके सफर को और भी आसान बनाएगी। इसे अगर लॉन्‍ग बस कहा जाए तो गलत नहीं होगी पर एक बस के मुकाबले ये कई अधिक संख्‍या में यात्रियों को ले जा सकती है। 

5- इस ट्रेन की सबसे खास बात है इसके चलने का तरीका जो पुराने तरीको से हटकर है। इसे चलने के लिए किसी भी तरह का फिजिकल ट्रैक नहीं चाहिए। इस खास ट्रेन के लिए खास तौर पर रोड पर डॉट के रूप में अद्रश्‍य लाइनों को तैयार किया गया है। 

 6- एक किलोमीटर की कॉस्‍ट 17 से 23 मिलियन यूरो है। इस ट्रेन को चलाने के लिए रोड के अंदर सेंसर फिट किए जाते हैं। ये सेंसर ट्रैवल की जानकारी एकत्र करने में भी सक्षम होते हैं। \

Thursday, 5 October 2017

क्या होगा अगर पृथ्वी पर सभी लोग एक ही समय पर साथ में जम्प करें?



ज़रा सोच के देखिए, क्या पृथ्वी पर सभी लोग एक ही समय में एक साथ जम्प कर सकते हैं। हालांकि यह कल्पना करना बहुत कठिन है, लेकिन अगर ऐसा हो जाए तो क्या वो सभी मिलकर पृथ्वी को हिला सकते हैं। हमें पता नहीं होता, लेकिन सच्चाई तो यह है कि बहुत से लोग एक ही समय पर एक जैसे काम करते हैं और उन्हें पता भी नहीं होता।

हालांकि अगर सभी किसी एक समय में खड़े हो जाएं और जम्प करें, तो क्या होगा? अगर 7 अरब से अधिक इंसान एक-दूसरे एक साथ जम्प करने के लिए खड़ा हो जाएं, तो हम लगभग 500 वर्ग मील (805 वर्ग किलोमीटर), या लॉस एंजिल्स के आकार का एक शहर भर देंगे।
हम मान लेते हैं कि हम सभी किसी तरह से एक साथ खड़े हो गए, और एक साथ जम्प करने में भी कामयाब हो गए, तो क्या होगा? तब भी कुछ भी नहीं होगा। निराशाजनक, है ना? उन बहुत सारे लोगों का द्रव्यमान भले ही हम सभी को बहुत बड़ा लग सकता है, लेकिन धरती के द्रव्यमान की तुलना में यह कुछ भी नहीं है।

वास्तव में, अगर हम सब एक साथ जम्प करते हैं तो टेक ऑफ के टाइम हम पृथ्वी को बहुत ही कम ( उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन परमाणु की चौड़ाई से भी कम) मूव कर पाएंगे, वहीं जब हम वापस लैंड करेंगे, तो पृथ्वी भी वापस अपनी जगह पर आ जाएगी, जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं था।
तो पृथ्वी को मूव करने के लिए क्या करना होगा? यह एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब साइंटिस्ट भी खोज रहे हैं, क्योंकि सूरज बहुत ही ज्यादा गर्म है और यह अनुमान लगाया गया है कि लगभग 1.1 अरब साल में, सूरज इतना गर्म हो जाएगा कि यह 120 डिग्री फारेनहाइट (50 डिग्री सेल्सियस) से पृथ्वी के तापमान को करेगा।
जब ऐसा होगा तो हमारे लिए यहां सर्वाइव करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इस स्थिति को देखते हुए, कुछ लोगों ने अध्ययन किया है कि बढ़ते आग के गोला से पृथ्वी को थोड़ा दूर कैसे बढ़ाया जाए? वैसे आपको बता दें कि 21 वीं शताब्दी यह तकनीक मौजूद नहीं है और यह शायद ही कभी मौजूद हो पाएगी।

ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पृथ्वी को सिर्फ 20 नैनोमीटर प्रति सैकंड मूव करने के लिए करीब 1 अरब 11 टन रॉकेट्स को एक साथ एक ही समय पर और एक ही दिशा में लॉन्च करना होगा। तो अगर आप सोच रहे हैं कि आप लोगों को इकट्ठा कर के सभी क साथ कूदोंगे, तो पेड़ों या पहाडों को हिलाने के लिए ही काफी होगा।

Monday, 18 September 2017

वैज्ञानिकों की समझ से बाहर है ये शिव मंदिर

आज आपको भारत में ऐसे ऐसे मंदिर मिल जाएंगे जो हजारों साल पुराने हैं. कई मंदिर तो बेहद ही रहस्यमई है और इस सवाल का जवाब किसी के पास भी नहीं है कि उन्हें बनाया कैसे गया. कुछ मंदिर तो ऐसे भी हैं जब आर्किटेक्चर का विशाल नमूना है जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है. इन मंदिरों ने वैज्ञानिकों को यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि प्राचीन विज्ञान भी आधुनिक विज्ञान से अत्यधिक प्रगतिशील तथा आगे थी.

आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे शिव मंदिर की जिसे लगभग 1000 साल पहले बनाया गया था और आज भी ऐसा कुछ दोबारा बनाया नहीं जा सकता है. हम बात कर रहे है बृहदेशर मंदिर के बारे में जोकि स्थित है तंजावुर तमिल नाडु में. इस मंदिर के निर्माण कुशलता ने तो बड़े-बड़े आर्किटेक्चर को भी चकरा कर रख दिया है. यह मंदिर 10 वीं सदी में बनाया गया था और उसे बनाया गया था राजा राजा चोला के द्वारा. इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 60 m है और इसे दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर भी कहा जाता है. इस मंदिर के सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि इसे ग्रेफाइट पत्थरों को काटकर बनाया गया है.

ग्रेफाइट पत्थर बहुत अधिक सख्त पत्थर होते हैं. इस तरह के लगभग 60 किलोमीटर के दायरे में कोई भी ऐसी चट्टान नहीं है जहां से यह पत्थर लाए जा सकें. इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य है मंदिर की चोटी पर रखा पत्थर जिसका वजन 80000 किलो है और इसे कुंभ बम कहा जाता है. वैज्ञानिक आज इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि इतना बड़ा पत्थर इतनी उचाई पर बिना किसी आधुनिक तकनीक के कैसे पहुंचाया गया होगा. एक नई थ्योरी के अनुसार लगभग 6 किलोमीटर लंबा मिट्टी का रैंप बनाना गया होगा. तब जाकर यह इस मंदिर की चोटी पर रखा गया होगा.

इस मंदिर के आर्किटेक्चर का कमाल है यहीं खत्म नहीं होता. इससे भी हैरान करने वाले बात तो यह है कि इस मंदिर को बनाने में किसी भी प्रकार के जोड़ने वाले मिश्रण का इस्तेमाल नहीं किया गया यानी बिना सीमेंट और कुछ भी. इन पत्थरों के ब्लॉक्स को ही इस तरह काटा गया ताकि वह एक दूसरे के बीच फिट हो सके. आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि इस मंदिर की कोई भी निव नहीं है यानी इसे खोद कर नीचे से नहीं बनाया गया. बल्कि इसे एक सपाट मैदान पर बनाया गया है.

पिछले 8 सबसे बड़े भूकंप भी इसमें कोई दरार नहीं ला सके. आज पश्चिमी देशों में बनी इमारतें कुछ सालों में ही टेढ़ी होती जा रही है जिसका सीधा-सीधा उदाहरण पीसा की बिल्डिंग है. फिर भी यह शिव मंदिर आज भी वैसा का वैसा जैसा यह 1000 साल पहले था. यह मंदिर सबूत हैं भारत के प्राचीन तथा अत्याधुनिक क्षमता का जिसे भारत से ही लूटा गया और जिसे दूसरे देशों द्वारा अपनाया जा रहा है. भले ही आप पश्चिम देशों के विज्ञान को विकसित मानते हैं लेकिन यह सबूत आज भी गवाही दे रहे हैं कि हमारी प्राचीन विज्ञान अति विकसित थी.

Popular Posts

Recent Posts

Unordered List

Text Widget

Blog Archive

Search This Blog

BTemplates.com