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Thursday, 21 September 2017

RBI के गवर्नर को पढ़ा चुके ये IIT प्रोफेसर अब जी रहे ऐसी जिन्दगी

भोपाल। मध्यप्रदेश के बैतूल से आज हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलाने जा रहे है जिसने त्याग की एक मिसाल कायम की है। इस शख्सका नाम सरकार की ओर से पद्म पुरस्कार दिए जाने वालो की लिस्ट में शामिल था 26 साल से यह शख्स आदिवासियों आदिवासियों के बीच रह रहा है और आदिवासियों के हित में ही काम कर रहा है। जब पुलिस ने संदिग्ध जान उस शख्स से पूछताछ की तो पुलिस की आँखे फटी रह गई।

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि यह शख्स और कोई नही बल्कि दिल्ली IIT के पूर्व प्रोफेसर आलोक सागर है।अलोक सागर रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को भी पढ़ा चुके है।

 इन्‍होंने लग्जरी लाइफस्टाइल, व्हाइट कॉलर जॉब, चमचमाती गाड़ी, बंगला और सुकून की जिंदगी, सब छोड़कर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने को प्राथमिकता दी।

20 जनवरी 1950 को दिल्ली में जन्‍मे आलोक ने 1977 में अमेरिका के हृयूस्टन यूनिवर्सिटी टेक्सास से शोध डिग्री ली। 

टेक्सास यूनिवर्सिटी से डेंटल ब्रांच में पोस्ट डाक्टरेट और समाजशास्त्र विभाग, डलहौजी यूनिवर्सिटी, कनाडा में फैलोशिप भी की. आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग करने के साथ ही विदेश में पढ़ाई कर डिग्रियां हासिल की। इसके बाद आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर बन गए।

आलोक सागर ने पद्म पुरूस्कार लेने से भी मना कर दिया दिया था जब उनसे इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि ‘मैं एक आम इंसान हूं। पुरस्कार विशेष पहचान लाते हैं, जो एक-दूसरे के बीच गैर बराबरी पैदा करते हैं। मैं अपनी पहचान खोना नहीं चाहता। मैं कोई पुरस्कार नहीं लूंगा। जैसे जातिगत गैर बराबरी है, ठीक वैसे ही पुरस्कार छोटे-बड़े की भेद पैदा करते हैं।

जब सागरजी से पूछा गया कि, फिर प्रधानमंत्री भी क्यों कोई बने? उन्होंने जवाब दिया,’पीएम एक पद है, भूमिका है। यह पुरस्कार नहीं है। पदम पुरस्कार एक ठप्पा है, मुकुट है, जो मुझे आम पब्लिक से अलग कर देगा।’ आलोक सागर ने 1990 से अपनी तमाम डिग्रियां संदूक में बंदकर रख दी थीं। बैतूल जिले में वे सालों से आदिवासियों के साथ सादगी भरा जीवन बीता रहे हैं। वे आदिवासियों के सामाजिक, आर्थिक और अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं। इसके अलावा गांव में फलदार पौधे लगाते हैं।

Wednesday, 20 September 2017

क्या आप जानते है की रोड़ के साइड वाले पेड़ो को लाल और सफेद रंग से क्यों पोता जाता है

आप ने अक्सर हि पेड़ो को लाल और सफेद रंग से पुता देखा होगा.पर क्या आप यह जानते है की पेड़ो को लाल और सफेद रंग से क्यों पोता जाता है.

पेड़ो को पोतनें के लिए वैसे तो अधिकतर सफेद रंग का इस्तमाल किया जाता है.पेड़ो को पोतने का एक कारण यह भी हैं की वह टूटे न सड़े न पेड़ो को पोतने पर सबसे पहले उनकी खाली दरारों को भरा जाता है.जिससे पेड़ो में सड़न नही आती है और वह मजबूत बनें रहते है और पेड़ के टूटने के चांस घट जाते है यदि पेड़ का कोई तना टूटने वाला होता है तो उसे भी पोत दिया जाता है.इस प्रकार से पेड़ को सुरक्षित किया जाता है जिससे उसका ध्यान आगे भी रखा जा सके.

और हम आपको बता दे की रोड़ के साइड वालें पेड़ो को इस लिए पोता जाता है की वह पेड़ इस बाद की निशानी होते की वह पेड़ वन विभाग की नज़र में है और कोई उनको काटें न |

जल्द कीजिए, जियोफाई डोंगल मिल रहा है आधी कीमत पर

आम लोगों पर इंटरनेट की पहुंच आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली दूरसंचार क्षेत्र की कंपनी रिलायंस जियो ने इस त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के लिए जबरदस्त ऑफर की घोषणा की है। उपभोक्ताओं को इस फेस्टिव ऑफर के तहत जियोफाई डोंगल लगभग आधी कीमत में 999 रुपये में उपलब्ध होगा।
जियोफाई की वास्तविक कीमत 1,999 रुपये है लेकिन फेस्टिव ऑफर का लाभ उठाकर उपभोक्ता मात्र 999 रुपये में इसे खरीद पायेंगे। बीस सितंबर से शुरू यह ऑफर सीमित अवधि के लिए उपलब्ध है। उपभोक्ता ऑफलाइन और ऑनलाइन स्टोर के जरिए इस ऑफर का लाभ उठा सकते हैं। यह ऑफर जियोफाई एमटूएस मॉडल के लिए वैध है, कंपनी का कहना है कि जियोफाई देश में वाईफाई हॉटस्पॉट श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकता है। सीमित अवधि के इस ऑफर से जियोफाई देश में डेटा कार्ड और डोंगल श्रेणी में एक बार फिर क्रांति लाने को प्रतिबद्ध है।
2 जी / 3 जी स्मार्टफोन उपभोक्ता, लैपटॉप प्रयोक्ता और अन्य गैर-4 जी स्मार्ट डिवाइस उपयोगकर्ता अब जियोफाई के साथ जियो डिजिटल लाइफ का आनंद ले सकते हैं। जियोफाई उपयोगकर्ता असीमित 4जी डेटा, एचडी वॉइस कॉल और वीडियो कॉल, एसएमएस और साथ ही जियो सिनेमा, जियो टीवी जैसे कई जियो एप्स का आनंद ले सकते हैं, जियोफाई डिवाइस सभी रिलायंस डिजिटल स्टोर, जियो आउटलेट््स, जियो पार्टनर रिटेलर्स और वेबसाइट पर उपलब्ध है।

Tuesday, 19 September 2017

कोई IPS ऑफिसर तो कोई हो गया गरीब, केबीसी विजेता आज जीते हैं ऐसी LIFE

 बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की होस्टिंग वाला शो 'कौन बनेगा करोड़पति' का 9वां सीजन शुरू हो चुका है। इतने सीजन आने के बावजूद शो हर दिन नया रोमांच लेकर आता है। यूके के मशहूर रिएलिटि शो 'हू वांट्स टू बी मिलेनियर' के इस हिंदी संस्करण ने भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री में नई क्रांति ला दी थी। भारी-भरकम पुरस्कार राशि और आम-आदमियों को शो में अपनी किस्मत आजमाते देख मध्यमवर्गीय बहुल भारत देश में इस शो ने खासी लोकप्रियता बटोरी थी।
आइए एक नजर डालते हैं, उन भाग्यशाली विजेताओं पर जो अपनी बुद्धि और ज्ञान के दम पर करोड़पति बनें साथ ही ये भी जानते हैं कि करोड़पति बनने के बाद उनकी जिंदगी में कैसा बदलाव आया और आज वो क्या कर रहे हैं?
हर्षवर्धन नवाथे

क्या आपको हर्षवर्धन नवाथे याद है? जी हां, हर्षवर्धन ही इस शो के पहले करोड़पति बने थे। शो के पहले सीजन यानी 2000 में 27 साल की उम्र में यूपीएससी की तैयारी करने वाले इस नौजवान ने ये शो जीता था। हालांकि उसके बाद पैसे के साथ मिले फेम ने हर्षवर्धन को पढ़ाई से दूर कर दिया। आज हर्षवर्धन उन पैसों से खुद के बिजनेस के साथ सफल वैवाहिक जीवन गुजार रहे हैं।
रवि मोहन सैनी

महज 14 साल की उम्र के इस बच्चे ने 2001 में केबीसी जूनियर में भाग लिया, और हर सवाल का सही जवाब देते हुए 1 करोड़ रुपये जीते थी। रवि उस वक्त कक्षा दसवीं के छात्र थे जब उन्होंने एक करोड़ रुपए का इनाम जीता था। हालांकि अब आपको जानकर खुशी होगी कि वो प्रतिभाशाली बच्चा बड़ा होकर एक पुलिस ऑफिसर बन चुका है और भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहा है।
राहत तस्लीम

एक रूढ़िवादी परिवार से आने वाली राहत ने जब केबीसी में भाग लिया तब वो मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी कर रही थी और उनकी शादी भी हो चुकी थी। लेकिन राहत की किस्मत में चूल्हा-चौके के अलावा भी कुछ और ही था। केबीसी में एक करोड़ जीतने के बाद आज राहत झारखंड के गिरीडीह के मॉल में अपनी खुद की शॉप चला रही हैं। केबीसी ने न सिर्फ राहत को पैसे और सपने दिए बल्कि आत्मविश्वास भी जगाया।
सुशील कुमार

बिहार के मोतिहारी से आए कंप्यूटर ऑपरेटर सुशील कुमार केबीसी के सबसे लोकप्रिय विजेता रहे। केबीसी में 5 करोड़ की प्राइज मनी जीतने वाले सुशील बेहद गरीब परिवार से थे जो मनरेगा के तहत काम करते थे। केबीसी जीतने के बाद उन्हें फेम भी मिला, वो एक डांस रिएलिटी शो में भी नजर आए थे। 5 करोड़ में से टैक्स कटने के बाद उन्हें 3.6 करोड़ मिले थे, जिसे उन्होंने अपना घर बनाने, गांव में खेत खरीदने और परिजन की मदद करने में लगा दिया। बाद में सुशील के बारे में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो बेरोजगार हैं और पैसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सुनमीत कौर

फैशन डिजाइनिंग कोर्स करने के बावजूद ससुराल वालों ने जब करियर बनाने की अनुमति नहीं दी तो भी सुनमीत कौर ने हिम्मत नहीं हारी। टिफिन सेंटर शुरू किया लेकिन किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया। एक सड़क दुर्घटना ने उन्हें 6 महीने के लिए बिस्तर पर डाल दिया। बावजूद इसके बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जैसे काम करने वाली सुनमीत केबीसी की विनर रहीं। उन्हें 5 करोड़ मिले। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन पैसों से उन्होंने खुद के बिजनेस के रूप में फैशन बुटिक शुरू किया था।
ताज मोहम्मद

केबीसी के 7वें सीजन में 1 करोड़ रुपये जीतने वाले प्रतिभागी ताज मोहम्मद पेशे से इतिहास शिक्षक के शिक्षक थे। कौन बनेगा करोड़रपति में जीती पुरस्कार राशि का इस्तेमाल ताज मोहम्मद ने बेटी के इलाज में लगाया, एक घर खरीदा तो वही दो अनाथ लड़कियों की शादी का खर्चा भी उठाया।
कौन बनेगा करोड़पति की सबसे बड़ी जीत दिल्ली के दो भाइयों अचिन-सार्थक नरूला के नाम दर्ज है। 

नरूला बंधुओं ने संयुक्त रूप से 7 करोड़ रुपए जीते थे। शो जीतते ही दोनों के लिए शादी के प्रस्ताव आने शुरू हो चुके थे। लगातार 10 सालों की कोशिश के बाद हॉटसीट तक पहुंची इस जोड़ी ने 7 करोड़ से अपनी मां का कैंसर का इलाज करवााय और बचे पैसों से खुद का व्यवसाय खोल दिया।

पीएम मोदी ने जन्मदिन के मौके पर लिखी इस टीवी स्टार को चिट्ठी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर टीवी इंडस्ट्री और फिल्म इंडस्ट्री के कुछ मशहूर स्टार्स को पत्र लिख कर उनसे स्वच्छता अभियान के साथ जुड़ने की अपील की है।

स्टार प्लस के मशहूर शो ‘ये हैं मोहब्बतें’ के रमन भल्ला का किरदार निभा रहे करण पटेल को पीएम ने चिट्ठी लिखी है। करण ने इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी की चिट्ठी को शेयर करते हुए लिखा है यह मेरे लिए सम्मान है जो मुझे खुद पीएम मोदी ने स्वच्छता आंदोल का हिस्सा बनने के लिए सक्षम समझा है।

इसके अलावा पीएम मोदी ने फिल्म स्टार अनिल कपूर को भी चिट्ठी लिखा है। जिसमें अनिल कपूर से स्वच्छता अभियान में साथ देने को कहा है। 

अनिल ने यह चिट्ठी ट्वीटर पर शेयर कर अपने फैंस को इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि धन्यवाद पीएम मोदी जा मुझे यह विशेष आमंत्रण देने के लिए, मैं स्वच्छता के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा।


Monday, 18 September 2017

एक ऐसा देश जहां पर शादी से पहले संबंध बनाना है जरूरी अगर मजा आया तो होती है शादी

हमारा देश एक ऐसा देश है यहां की संस्कृति और समाज संबंध जैसे विषय पर खुलकर बात करने की अनुमति नहीं देता और जो इंसान इस पर खुलकर बात करता है उन्हें बेशर्म कहा जाता है ।
भारत ही नहीं दुनिया के बहुत सारे देशों में शादी से पहले संबंध बनाना सही नहीं माना जाता है लेकिन शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक ऐसा भी देश है जहां लड़की का बाप ही उसे कहता है कि वह बाहर जाकर लड़कों से मिले और जो अच्छा लगे उनके साथ संबंध बना ले।

कंबोडिया के आदिवासी समुदाय में यह प्रथा है यहां के लोग अपनी ही बेटी को अलग-अलग लड़कों के साथ संबंध बनाने की अनुमति देते हैं इस प्रथा के मुताबिक जैसे ही किसी किसी लड़की की महावारी आना शुरू हो जाती है तो उसे जवान मान लिया जाता है ।
उसके बाद बाप अपनी ही बेटी के लिए एक झोपड़ी तैयार करता है इसके बाद बाप अपनी बेटी को कहता है कि वह आदिवासी समुदाय के लड़कों से मिले और जरूरत पड़ने पर उसके साथ उस झोपड़ी पर संबंध बना ले ।
उसके बाद लड़की को अगर कोई लड़का पसंद आया तो उसके साथ शादी कर सकती है इस तरह समुदाय में एक बाप ही अपनी बेटी को कहता है कि वह एक से ज्यादा लड़के के साथ रिलेशन बनाएं ताकि उसके लिए अच्छा लड़का मिल सके हालांकि समय बदलने के साथ साथ है ।
आदिवासियों की सोच में भी परिवर्तन आई है जिसके चलते लड़कियां शारीरिक संबंध बनाने से पहले निरोध का इस्तेमाल करने लगी है लेकिन इस समुदाय के लोग इस प्रथा को कहीं बदलने वाले नहीं है ।
ऐसे में अगर कोई लड़की गर्भवती हो जाती है लेकिन जिस लड़के के साथ संबंध बनाती है उससे वह गर्भ धारण करती है उसे पसंद न करके किसी दूसरे को पसंद कर सकती है और तब दूसरे लड़के को उस लड़की से शादी करके बच्चे को अपना नाम देना पड़ेगा जो कि गलत है ।
दोस्तों आप लोगों की स्पेशल में क्या राय है कमेंट करके जरुर बताइए और अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे लाइक और शेयर करें इसी तरह की और अधिक खबरें पढ़ने के लिए हमें फॉलो करना न भूले।

भारत ने दुनिया को दी है हैरान कर देने वाली ये 5 चीज़ें

दुनियाभर में भारत अपनी संस्कृति और पाक शैली के लिए जाना जाता है. वहीँ अगर आबादी की बात करें तो ये देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भी है. इतना ही नहीं बल्कि भारत ने ही दुनिया को ऐसी कई सारी चीज़ें दी हैं जो लोगों की जीवनशैली को आसान ही बना देगी. तो आज हम बात करेंगे ऐसी ही कुछ पांच चीज़ों की. मगर उस्से पहले आप ज़रूर हमे फॉलो करें ऐसी तकनीकी ख़बरों के लिए.
फाइबर ऑप्टिक्स

क्या आप ऐसी कोई दुनिया की कल्पना आज के वक़्त में कर सकते हैं जहाँ इंटरनेट या टेलीफोन ही न हो. अगर वो नहीं होता तो शायद आप ये खबर भी अभी नहीं पढ़ रहे होते. फाइबर ऑप्टिक्स ने ही दुनियाभर में इंटरनेट, संचार और मेडिकल की दुनिया में एक क्रांति मचा दी है.
नरिंदर सिंह कपानी एक वैज्ञानिक थे. इन्हे ही फाइबर ऑप्टिक्स का जनक माना जाता है. इन्होने साल 1955 से 1965 के बीच कई टेक्निकल पेपर लिखे थे. इनमे से एक पेपर साइंटिफिक अमेरिकन में भी छपा था और इसकी मदद से ही फाइबर ऑप्टिक्स को स्थापित किया जा सका.
सांप-सीढ़ी

आज के जितने कंप्यूटर गेम्स हैं उन्हें भारत के सांप-सीढ़ी से ही प्रेरित किया जाता है. ये भारतीय खेल इंग्लैंड में काफी लोकप्रिय हुआ. इस खेल से हिन्दू बच्चों में मूल्य को सीखने के तौर पर देखा जाता है. इसमें सीढ़ियों को सदाचार और सांप को शैतान माना जाता है.
शैम्पू

शैम्पू से बालों को आखिर कौन सा व्यक्ति नहीं धोता होगा. शैम्पू से नहाने के बाद ही लगता है की हाँ अब ताज़गी अच्छी से है. 15 वीं शताब्दी में पौधे पत्तियों से शैम्पू बनाया जाता था भारत में. ब्रिटिश काल के व्यापारियों ने इसे यूरोप पहुँचाया था.
फ्लश टॉयलेट

सबूतों से ये पता चलता है की फ्लशिंग शौच की सुविधा सिर्फ सिंधु घाटी में ही थी. यही इलाका आज कश्मीर बना. यहाँ पर सीवेज काफी अच्छी स्थिति में है.
यूएसबी पोर्ट

यूएसबी जिसका मतलब यूनिवर्सल सीरियल बस पोर्ट है जिसकी खोज इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को जोड़ने में मदद में लिया जाता है. इसको बनाने वाले व्यक्ति का नाम अजय भट्ट है. साल 1990 में भट्ट और उनकी टीम ने जब इसपर काम शुरू किया तो कंप्यूटर की कनेक्टिविटी में ये एक अहम् फीचर बन गया. मगर इस खोजकर्ता को तब पहचान मिली जब साल 2009 में इंटेल का एक टेलीविज़न विज्ञापन आया.

Saturday, 16 September 2017

मिलिए असली फुंगसुक वांगडू यानि रैंछो से, पढ़िए उनकी असली कहानी

मशहूर फ़िल्म 'थ्री ईडियट्स' जिसमें एक किरदार है रैंछो यानि रणछोड़ दास छांछड़ यानि फुंगसुक वांगडू फिल्म में इस किरदार को मशहूर अभिनेता आमिर खान ने निभाया था. आप हम आपको उस शख्स के बारे में बताने वाले है जिनके ऊपर यह फ़िल्म बनी है.
इस रैंछो का असली नाम सोनम वांगचुक है. सोनम ने श्रीनगर के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इंजीनियरिंग की पढाई की हैं. सोनम बताते है कि इंजीनियरिंग करने के दौरान पिता से उनका विवाद हुआ था. सोनम मैकेनिकल इंजीनियरिंग करना चाहते थे जबकि उनके पिता उनसे सिविल इंजीनियरिंग करवाना चाहते थे. पिता की बात न मानने पर सोनम को घर से निकाल दिया गया था.
आज सोनम उन प्रतिभावान बच्चों जिन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता है उनके सपने पूरे करने का काम कर रहे हैं और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ मिलकर लद्दाख के स्कूलों में पाठ्यक्रम को बदलने की कोशिश कर रहे है उनका मानना है कि किताबों से ज्यादा विद्यार्थियों को प्रयोग पर ध्यान देना चाहिए.सोनम वांगचुक को रोलेक्स पारितोषिक से भी नवाजा गया है अबतक केवल दो भारतीय को ही इस पुरस्कार से सन्मानित किया गया है. इस पुरस्कार से उन्हें जो पैसे मिले है उन्ह पैसो को भी सोनम ने अपने स्कूल के लिए दान कर दिया है. सोनम के द्वारा बनाया गया आइस स्तूप की हर तरफ चर्चा है जिससे लद्दाख़ जैसे जगहों पर भी पानी को रोख कर रखा जा सकता है.

Friday, 15 September 2017

भारत की धरती से शिंजो एबी ने दी पाक को नसीहत,कहा- बंद करो आतंकवाद

अहमदाबाद, जेएनएन। दो दिवसीय भारत दौरे पर आए जापान के पीएम शिंजो एबी ने भारत को बुलेट ट्रेन की सौगात दी तो पाकिस्तान को खूब खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को मुंबई और पठानकोट में हुए आतंकी हमले के गुनाहगारों को सजा देनी चाहिए। उन्होंने आतंक की आलोचना करते हुए पूरे विश्व में शांति की कामना भी की।

इसके साथ ही पीएम मोदी और पीएम एबी ने उत्तरी कोरिया को परुमाणु परीक्षण और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम की कड़ी निंदा की। तो वहीं पीएम मोदी और पीएम शिंजो एबी ने पाकिस्तान से आतंकवादी हमलों के दोषियों को सजा देने की बात कही।
शिंजो एबी ने भारत के साथ दोस्ती पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि ताकतवर जापान भारत के हित में है और मजबूत भारत जापान के हित में है। जापान और भारत के बीच का सहयोग केवल द्विपक्षीय नहीं रहा, यह यह विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी में विकसित हुआ है। भारत और जापान स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानव अधिकार और कानून का नियम जैसे बुनियादी मूल्यों को साझा करते हैं।

पीएम आबे ने आतंक को लेकर पाक की भी आलोचना की है। उन्होंने साझा बयान में मुंबई और पठानकोट हमले का जिक्र करते हुए कहा कि पाक को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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